पुरोला : सत्ता पाने वाली पार्टी का विधायक नहीं जीतता यहां से, निर्दलीय पाते हैं अच्छे वोट

देहरादून। सीटों के क्रम के आधार पर उत्तराखंड में पहले नंबर की सीट पुरोला है। यहां पर 2017 में कांग्रेस के टिकट पर राजकुमार विधायक बने थे, लेकिन वह हाल ही में भाजपा में शामिल हो गए हैं। इस सीट पर 2007 में कांग्रेस के राजेश जुवांठा व 2012 भाजपा के मालचंद विजयी रहे। यदि हम इन रुझानों को देखें तो पिछले 15 सालों से इस सुरक्षित सीट का परिणाम हमेशा ही राज्य में सत्ता पाने वाली पार्टी से अलग रहा। यानी जो पार्टी सत्ता में आई, उसके प्रत्याशी को पुरोला में हार मिली। 2007 में भाजपा सत्ता में आई तो कांग्रेस को पुरोला में जीत मिली, 2012 में कांग्रेस की सरकार बनी और पुरोला से भाजपा के मालचंद जीते, 2017 में भाजपा की फिर वापसी हुई तो यहां पर कांग्रेस के राजकुमार विजयी रहे।

इस सीट की एक खूबी यह है कि यहां पर निर्दलीय उम्मीदवारों को भी भरपूर समर्थन मिलता रहा है। 2007 में मालचंद ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर 14942 मत हासिल किए और दूसरे स्थान पर रहे। विजयी रहे कांग्रेस के राजेश जुवांठा उनसे सिर्फ 525 वोट ही अधिक ले सके। जुवांठा को 15467 मत मिले। 2012 में राजकुमार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और वे तत्कालीन विधायक जुवांठा से करीब चार हजार वोट अधिक लेकर दूसरे नंबर पर रहे। 2017 में राजकुमार कांग्रेस में चले गए और पहली बार इस सीट पर भाजपा कांग्रेस में सीधी टक्कर रही, जिसे कांग्र्रेस ने करीब एक हजार मतों से जीत लिया। मालचंद दूसरे स्थान पर रहे। इस बार निर्दलीय के रूप में दुर्गेश्वर लाल तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 13508 मत मिले, जबकि राजकुमार को 17798 मत मिले।

इस बार इस सीट नए समीकरण उभरने की पूरी संभावना है। पहले नंबर पर रहे राजकुमार और दूसरे नंबर पर रहे मालचंद दोनों ही भाजपा से टिकट के दावेदार हैं। अब सवाल यह है कि भाजपा इन दोनों में से किसी एक को टिकट देगी या फिर नया प्रत्याशी उतारेगी। कांग्रेस के पास सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन भाजपा में चुनाव से पहले टिकट की लड़ाई कोई गुल तो खिलाएगी। पार्टी के भीतरी सूत्रों का कहना है कि राजकुमार लेकर पार्टी ने अपने पांव पर ही कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। पुरोला में विकास कार्य न होना भी बड़ा मुद्दा है।

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