उत्तराखंड के लहर दरोगा – मुफ्त टीके में भी निकाला कमाई का रास्ता

देहरादून। आपमें से बहुत से लोगों ने लहर दरोगा की कहानी सुनी होगी, लेकिन जिन लोगों ने नहीं सुनी उनके लिए एक बार फिर से सुना देते हैं। एक राजा का एक साला था। रानी को अपना भाई बहुत ही प्यारा था, इसलिए राजा को उसे अपने शासन में कोई न कोई ओहदा देना ही पड़ता था, लेकिन साला था एक नंबर का रिश्वतखोर। राजा जहां भी उसे लगाता, वह वहीं रिश्वतखोरी शुरू कर देता। परेशान होकर राजा ने एक तरकीब निकाली और साले से कहा कि वह आज से लहर दरोगा है और उसका काम समुद्र की लहरें गिनना है। वह रोज उठने वाली लहरों को गिनकर हर शाम राजा को रिपोर्ट देगा। साले ने तुरंत ही काम शुरू कर दिया और बंदरगाह पर एक टॉवर पर बैठ कर लहरें गिनने लगा। इसी बीच, देश-विदेश के जहाज माल लेकर तट की ओर आने लगे तो उसने सभी जहाजों को रोक दिया और कहा कि उसे लहरें गिनने का महत्वपूर्ण कार्य राजा की ओर से दिया गया है और अगर एक भी लहर इधर से उधर हुई तो जो भी ऐसा करेगा, उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा। परेशान होकर जहाज वालों ने लहर दरोगा की मुट्ठी गर्म करनी शुरू कर दी और दरोगा ने उस काम से भी कमाई शुरू कर दी जिसके बारे में राजा ने सोचा था कि वहां उनका साला कुछ भी नहीं कर सकेगा।

यही हाल हमारे उत्तराखंड में भी है। राजा का तो एक ही साला था, लेकिन उत्तराखंड में तो हर जगह लहर दरोगा नजर आ जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर पूरे देश में कोरोना का मुफ्त टीकाकरण अभियान चल रहा है, लेकिन उत्तराखंड के लहर दरोगाओं ने इसमें भी कमाई का जरिया निकाल ही लिया। ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण और कम पढ़े लिखे लोगों को इन्होंने अपना निशाना बनाया। अस्पताल के लहर दरोगाओं ने अनपढ़ लोगों से कोविन एप पर रजिस्ट्रेशन के नाम पर बीस रुपये और पर्ची के नाम पर 10 रुपये की उगाही कर दी, यानी हर टीके पर 30 रुपये की वसूली। ये लहर दरोगा टीका लगाने वाले उन सभी लोगों ेको एक खास जगह पर रजिस्ट्रेशन के लिए भेजते हैं, जिनकी इंटरनेट तक पहुंच नहीं है। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रो पर यह धड़ल्ले से हो रहा है। इन्हीं स्वास्थ्य केंद्रों के बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व प्रधानमंत्री मोदी के चित्र वाला होर्डिंग भी लगा है, जिस पर लिखा है, धन्यवाद मोदी जी दुनिया के सबसे बड़े मुफ्त टीकाकरण अभियान के लिए। लेकिन लहर दरोगा की कहानी शायद धामी व मोदी को याद नहीं है। (लहर दरोगाओं का एक और किस्सा अगली किस्त में)  

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