हरीश रावत को किस पर है तेजाबी स्याही से हमले का शक?

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को यह डर क्यों सता रहा है कि कोई  स्याही में तेजाब मिलाकर फेंकने की साजिश कर रहा है? उत्तराखंड की राजनीति में इस सवाल ने हंगामा खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस साजिश के बारे में खुद रावत ने ट्वीट करके जानकारी दी है। इस बारे में हालांकि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत  दर्ज नहीं की गई है, लेकिन एक पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा समय में उत्तराखंड के सबसे कदृदावर नेता द्वारा जिस तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं, उस पर राज्य सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

हरीश रावत ने 2 सितंबर को एक ट्वीट करके कहा कि- अभी-अभी मुझे दो सूत्रों से सूचना मिली है, जो चिंताजनक है। राजनीति में प्रतिद्वंद्विता हो, स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता हो , वैचारिक प्रतिद्वंद्विता हो, कर्म करने की प्रतिद्वंद्विता हो, मगर यदि आप अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वी के ऊपर छात्रों को उकसा करके या कुछ लोगों को मोटिवेट करके, उनके जरिये स्याही में तेजाब मिलाकर, कांग्रेस के नेताओं की यात्रा में किसी एक व्यक्ति को चिन्हित करके फेंकना चाहेंगे तो ये उत्तराखंड की राजनीति के लिए कलंकपूर्ण अध्याय होगा और और यदि ऐसा होता है तो उस राजनीतिक दल का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि कौन राजनीतिक दल है। तो इसलिए सूचना मिलते ही मैं इसको सभी, जिसमें प्रशासनिक एजेंसीज भी सम्मिलित हैं, पुलिस भी सम्मिलित है और राजनीतिक दल भी सम्मिलित हैं, उनके साथ साझा कर रहा हूं। मेरी मां पूर्णागिरि से प्रार्थना है कि ऐसा न हो, यह केवल एक आशंका मात्र हो और उसके आधार पर यह सूचना मुझ तक पहुंची हो, मगर यदि ऐसा प्रयास होता है ताे यह उत्तराखंड की राजनीति का बहुत ही दुखद अध्याय होगा, एक बड़ा ही निंदनीय प्रयास होगा।

रावत ने अपने ट्वीट में यह तो स्पष्ट नहीं किया कि यह तेजाबी हमला उन पर हो सकता है, लेकिन वह जिस तरह किसी नेता को निशाना बनाने की बात कह रहे हैं, उससे साफ है कि वह नेता खुद रावत हो सकते हैं, क्योंकि उत्तराखंड कांग्रेस में इस समय वहीं सबसे बड़े नेता हैं और प्रतिद्वंद्वियों के निशाने पर भी हैं। यही नहीं उन्होंने 2 सितंबर को भी एक ट्वीट में लड़ते लड़ते मर मिटने कह बात कही थी। एक दिन बाद ही इस दूसरे ट्वीट से साफ है कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है। इस ट्वीट में रावत ने कहा था- #चंडीगढ़ में हूंँ, आज सुबह बहुत जल्दी आंख खुल गई थी। मन में बहुत सारे अच्छे और आशंकित करने वाले, दोनों भाव आये। कभी अपने साथ लोगों के द्वेष को देखकर मन करता है कि सब किस बात के लिये और फिर मैं तो राजनीति में वो सब प्राप्त कर चुका हूंँ जिस लायक में था। फिर मन में एक भाव आ रहा है, सभी लड़ाईयां चाहे वो राजनैतिक क्यों न हों, वो स्वयं सिद्धि के लिए नहीं होती हैं। सिद्धांत, पार्टी, समाज, देश, प्रांत कई तरीके के समर्पण मन में उभर करके आते हैं, कुछ लड़ाईयॉ उसके लिए भी लड़नी पड़ती हैं, चाहे उसको लड़ते-2 युद्ध भूमि में ही दम क्यों न निकल जाय! मेरे सामने भी पार्टी, पार्टी के सिद्धांत, पार्टी का नेतृत्व उत्तराखंड, उत्तराखंडियत, राज्य आंदोलन के मूल तत्वों की रक्षा आदि कई सवाल हैं। मैं जानता हूंँ कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल, मेरे ऊपर कई प्रकार के अत्याचार ढहाने की कोशिश करेगा, उसकी तैयारियां हो रही हैं, मुझे आभास है और पुख्ता आभास है, मगर ज्यों-2 ऐसा आभास बढ़ता जा रहा है, चुनाव में लड़ने की मेरी संकल्प शक्ति भी बढ़ती जा रही है। एक नहीं, कई निहित स्वार्थ जो अलग-अलग स्थानों पर विद्यमान हैं, मेरे राह को रोकने के लिए एकजुट हो रहे हैं। क्योंकि जिस तरीके का उत्तराखंड मैंने बनाने की कोशिश की है, वो बहुत सारे लोगों के राजनैतिक व आर्थिक स्वार्थों पर चोट करता है। एक रिटायर्ड नौकरशाह आजकल सत्तारूढ़ दल ही नहीं बल्कि तीन-तीन राजनैतिक दलों के लिये एक साथ राजनैतिक उघाई कर रहे हैं, खनन की उघाई भी बट रही है। उत्तराखंड में बहुत सारे लोगों के आर्थिक स्वार्थ जुड़े हुए हैं, उन लोगों को भी एकजुट करने का प्रयास हो रहा है ताकि वो कुछ मदद सत्तारूढ़ दल की करें और तो कुछ कद्दू कटेगा-बटेगा के सिद्धांत पर कुछ आवाजों को बंद करने के लिए उनमें बांट दें। यदि सत्तारूढ़ दल मुझे युद्ध भूमि में राजनैतिक अस्त्रों से प्रास्त करने के बाद अन्यान्य अस्त्रों की खोज में है तो दूसरी तरफ एक राजनैतिक दल किसान और कुछ राजनैतिक स्वार्थों के साथ राजनैतिक दुरासंधि हो रही है, कहीं-कहीं 22 नहीं तो 2027 की सुगबुगाहट भी हवाओं में है। मगर चंडीगढ़ का यह एकांत मुझे प्रेरित कर रहा है कि जितनी शक्ति बाकी बची है, उससे उत्तराखण्ड और उत्तराखंडियत की रक्षा व पार्टी की मजबूती के लिए जो मैं अपने व्यक्तिगत कष्ट, मान-अपमान और यातनाओं को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए और जब मैं अपने भावों के स्पंदन को विराम दे रहा हूंँ तो राजनैतिक संघर्ष का संकल्प मेरे मन में और होकर मुझे प्रेरित कर रहा है।

“जय हिंद” 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here