उत्तराखंड में बिक रहा हर दूसरा सेनेटाइजर काम का नहीं, इसीलिए तेजी से फैला कोरोना, तीसरी लहर में सावधानी की जरूरत

देहरादून। देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। कोरोना के नए डेल्टा वैरिएंट पर मौजूदा वैक्सीन भी प्रभावी नहीं दिख रही हैं। ऐसे में मास्क, सामाजिक दूरी और सेनेटाइजर ही बचाव के उपाय हैं। लेकिन, बाजार में मिल रहा हर दूसरा सेनेटाइजर मानकों के अनुरूप नहीं है। जिससे इसके प्रभावी होने के दर भी आधी हो गई है। कोरोना के आने के बाद से बाजार में सेनेटाइजर की भरमार हो गई है। सड़कों के किनारे हरे-नीले रंग की बोतलों में सेनेटाइजर बिक रहा है। देहरादून की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था स्पेक्स ने कोरोना के दौर में उत्तराखंड के सभी जिलों में सेनेटाइजर की टेस्टिंग का अभियान चलाया, जिसके परिणाम चौंकाने वाले रहे। इस जांच में 56 फीसदी सेनेटाइजर मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए यानी इनके इस्तेमाल से आपको कोई सुरक्षा हासिल नहीं हो सकती। लगभग एक चौथाई सेनेटाइजर तो ऐसे थे, जिनमें इस्तेमाल रंग ही जहरीला था।

स्पेक्स के सचिव डॉ बृज मोहन शर्मा ने बताया कि मई-जून में जब कोरोना अपने चरम पर था, उस समय उत्तराखंड के सभी जिलों में सेनेटाइजर टेस्टिंग अभियान -2021 चलाया गया, जिसमे 1050 नमूने एकत्र किए गए। जिसमे 578 नमूनों में अल्कोहल की मात्रा मानकों के अनुरूप नहीं मिली। कोरोना महामारी से बचने का मूल मंत्र भारत सरकार एवम अन्य स्वास्थ सम्बन्धी संस्थाओं ने यही समझाया कि दिन में बार-बार अल्कोहल वाले सेनेटाइजर से हाथ साफ़ करने से कोरोना जैसे वायरस से बचाव संभव है। इस सुझाव के कारण बाजार में इसकी मांग बढ़ गयी और कुछ लोगो ने इसमें मानकों की अनदेखी करके सेनेटाइजर बाजार में बेचने शुरू कर दिए । इस प्रक्रिया को समझने के उद्देश्य से स्पेक्स ने अपने साथियों के साथ मिलकर उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक अध्ययन 3 मई  से 5 जुलाई, 2021 तक किया। सेनेटाइजर के नमूनों में अल्कोहल परसेंटेज के साथ साथ हाइड्रोजन पराक्साइड, मेथेनॉल और रंगों की गुणवत्ता का परीक्षण अपनी प्रयोगशाला  में किया । यह प्रयोगशाला  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  विभाग ,भारत सरकार ने प्रदान की थी ।

अध्ययन के परिणाम :

– लगभग 56% सेनेटाइजर में अल्कोहल मानकों के अनुरूप नहीं मिला । यानि 1050 नमूनों में 578 नमूने फेल पाए गए।

– आठ नमूनों में मेथेनॉल पाया गया।

– 112 नमूनों में हाइड्रोजन पराक्साइड का प्रतिशत मानकों से अधिक मिला।

-278 नमूनों में जहरीले रंग मिले।

होना क्या चाहिए?

– अल्कोहल की प्रतिशत मात्रा 60 से 80 प्रतिशत होनी चाहिए।

6. हाइड्रोजन पराक्साइड  की मात्रा  0.5 परसेंट से ज्यादा न हो।

7. मेथनॉल नहीं होना चाहिए।

अल्मोड़ा जिले में 56% , बागेश्वर में 48%, चम्पावत में 64% , पिथौरागढ़  में 49% , उधम सिंह नगर  56 % , हरिद्वार   52 % , देहरादून    48 % , पौड़ी   में 54 % , टिहरी   में 58% , रुद्रप्रयाग में 60%, चमोली    में  64% , उत्तरकाशी    में  52%, नैनीताल में 56 %  एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था।

जिलावार रिपोर्ट-

अल्मोड़ा जिले में 56% नमूने फेल पाए गए जिसमे जाँच करने पर

10% वाले एलकोहॉल के  7  नमूने ,15%-8 नमूने ,30%-11,50% -6,60%-5,65%- 9,72%-  10  तथा  2 नमूनों में हाइड्रोजन पेरोक्साइड की मात्रा अधिक थी.

बागेश्वर में 50 नमूनों में 24 नमूने फेल पाए गए यानि 48% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 3  नमूने ,15%-2,35% -6,60%-4,65%- 6. 72%-  3 नमूने पाए गए.

चम्पावत में 50  नमूनों में 32 नमूने फेल पाए गए यानि 64% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 5 ,30%-8,50% -5,60%-4,65%- 4,72%-  6 नमूने पाए गए.

पिथौरागढ़  में 100 नमुनो  में 49 नमूने फेल पाए गए यानि 49 % नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 7 नमूने,15%-7,30%-9,50% -4,60%-6,65%- 6,72%-  १० नमूने पाए गए.

उधम सिंह नगर  में 100 नमुनो  में 56  नमूने फेल पाए गए यानि 56 % नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 6  नमूने,15%-5,30%-5,50% -8,60%-10,65%- 12,72%-  10 नमूने पाए गए.

हरिद्वार   में 100 नमुनो  में 52  नमूने फेल पाए गए यानि 52 % नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 13 ,40%-7,50% -8,60%-6,65%- 8,72%-  7,80%- 4 नमूने पाए गए.

देहरादून    में 100 नमुनो  में 48  नमूने फेल पाए गए यानि 48 % नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 15,15%-5,30%-8,50% -5,60%-4,65%- 7,72%-  6नमूने पाए गए.

पौड़ी   में 5० नमुनो  में 27  नमूने फेल पाए गए यानि 54 % नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 7 ,30%-8,50% -3,60%-4,72%-  5 नमूने पाए गए.

टिहरी   में 5० नमुनो  में 29  नमूने फेल पाए गए यानि 58% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 7 , 30%-8,50% -3, 60%-4,72%-  5 नमूने पाए गए.

रुद्रप्रयाग में 100 नमुनो  में 60  नमूने फेल पाए गए यानि 60% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 14 ,15%-7,30%-6,50% -12,60%-6,65%- 10,72%-  6 नमूने पाए गए.

चमोली    में 50  नमुनो  में 32  नमूने फेल पाए गए यानि 64% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 6 ,30%-8,50% -5,60%-3 ,72%-  10 नमूने पाए गए.

उत्तरकाशी    में 100 नमुनो  में 52  नमूने फेल पाए गए यानि 52% नमूनों में एलकोहॉल मानकों के अनुरूप नहीं था.

10% – 7 ,15%-10,30%-7,50% -5,60%-7,65%- 6, 72%-  10 नमूने पाए गए.

सेनेटाइजर में एलकोहॉल की प्रयाप्त मात्रा नहीं होने के कारण भी उत्तराखंड में कोरोना के मरीजों की संख्या सायद बढ़ी हो.

कृत्रिम रंग आपकी त्वचा पर जो विषाक्त पदार्थ छोड़ते हैं, वे आपकी संवेदनशीलता और जलन के जोखिम को बहुत बढ़ा देते हैं और इन रसायनों को आपके शरीर में अवशोषित होने देते हैं जहां वे और भी अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। वे आपके छिद्रों को भी अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे मुंहासों का अधिक खतरा होता है।

हाइड्रोजन पेरोक्साइड भी लिपिड प्रति ऑक्सीकरण के माध्यम से एक सीधा साइटोटोक्सिक प्रभाव डाल सकता है। हाइड्रोजन पेरोक्साइड के अंतर्ग्रहण से मतली, उल्टी, रक्तगुल्म और मुंह से झाग के साथ जठरांत्र संबंधी मार्ग में जलन हो सकती है; फोम श्वसन पथ को बाधित कर सकता है या फुफ्फुसीय आकांक्षा में परिणाम कर सकता है।

मेथनॉल त्वचा को ख़राब भी कर सकता है, जिससे डर्मेटाइटिस हो सकता है। तीव्र मेथनॉल एक्सपोजर के लक्षणों में सिरदर्द, कमजोरी, उनींदापन, मतली, सांस लेने में कठिनाई, नशे, आंखों में जलन, धुंधली दृष्टि, चेतना की हानि और संभवतः मृत्यु शामिल हो सकती है

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