Sunday, September 26, 2021

हरियाणा की बेटी ने फतह की उत्तराखंड की सबसे ख़तरनाक चोटी रुदुगैरा

Must read

विश्व विख्यात पर्वतारोही अनीता कुंडू ने उत्तराखंड में स्थित रुदुगैरा को फतह कर लिया। उनका ये अभियान प्रधानमंत्री और खेल मंत्री जी द्वारा चलाए गए अभियान फिट इंडिया मूवमेंट को बढ़ावा देने के लिए था। उन्होंने अनेक तरह की आपदाओं का सामना किया। विपरीत हालात के बावजूद हौसला बनाए रखा और शिखर को छू लिया। इस अभियान के लिए अनीता 25 सितम्बर को घर से निकली थी, 28 को सुबह 5 बजे गंगोत्री से चढ़ाई शुरू की थी। अनीता इस अभियान के तहत पूरे देश भर से 25 पर्वतारोहियों के एक दल नेतृत्व कर रही थी। अनीता ने सेटेलाइट फोन के माध्यम से बताया की बहुत ख़तरनाक रास्तों से होते हुए उन्होंने छह दिन में इस अभियान को सफल बनाया है। उन्होंने ये भी बताया कि अनेक जगह भयभीत करने वाली थी, पर मैंने अपने कदमों को जमाए रखा और आखिर तीन अक्टूबर को सुबह शिखर में तिरंगा लहराने में कामयाब रही। जब मैं शिखर को छू कर के नीचे आ रही थी तो ऊपर से एक पत्थर घूमता हुआ आया और मेरे पांव से लगता हुआ नीचे गया। शुक्र है परमात्मा का जो मैं बाल- बाल बच गई। माउंटेन में हर कदम पर इस तरह की अनेकों ख़तरनाक हालात बनती रहती है। जैसा कि आप सभी को ज्ञात है कि अनिता हाल ही में राष्ट्रपति के हाथों एडवेंचर के सबसे बड़े अवॉर्ड तेनज़िंग नोर्गे से भी सम्मानित हुई है। रुदुगैरा की ऊंचाई 5800 मीटर ऊंची है। परन्तु ये एक टेक्निकल माउंटेन है। इसकी अपनी भौगोलिक परिस्थितियां है।

अनिताकुण्डूकी_उपलब्धियां

2009 में पर्वतारोहण के बेसिक, एडवांस के साथ सभी कोर्स पास किए। सतोपंथ, कोकस्टेट आदि हिदुस्तान की अनेकों चोटियों को फ़तेह किया।

18 मई 2013 को नेपाल के रास्ते माउंट एवरेस्ट फ़तेह किया,

2015 में चीन के रास्ते एवेरेस्ट फ़तेह करने का प्रयास, 22500 फ़ीट पे पहुंचने पर भूकम्प ने क़दमो को रोका, इस त्रासदी में अनिता ने अपने अनेकों पर्वतारोही साथी खोए, अभियान कैंसल हुआ।

2017 में फिर चीन के रास्ते से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई, 60 दिन के कड़े संघर्ष के बाद 21 मई 2017 को एवरेस्ट फ़तेह किया…

नेपाल और चीन दोनों ही रास्तों से माउंट एवरेस्ट को फ़तेह करने वाली हिंदुस्तान की इकलौती बेटी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

2018 में पूरी दुनियां के सातों महाद्वीपों की चढ़ाई शुरू की…एशिया की माउंट एवरेस्ट, अफ्रीका की किलिमंजारो, यूरोप की एलबुर्स, अंटार्कटिका की विनसन मासिफ, दक्षिणी अमेरिका की अकांकागुवा, ऑस्ट्रेलिया की कारस्टेन्स पिरामिड शिखर फ़तेह। उतरी अमेरिका की देनाली के शिखर से 100 मीटर दूर ही बर्फ़ीले तूफान का सामना किया।

27 सितम्बर 2019 को माउंट एवरेस्ट के बराबर की ही ऊंचाई की चोटी माउंट मनासलू को फ़तेह किया।

अनिता कुण्डू के सभी अभियानों पर करोड़ों रुपए खर्च आता है, ये सभी राज्यसभा सांसद आर.के.सिंन्हा की विशाल कम्पनी एस.आई.एस. उठाती है। क्योंकि सिन्हा ने अपनी ने अनिता को अपनी बेटी के रूप में अडॉप्ट किया हुआ है। उन्होंने अनिता को अपनी सभी कम्पनी, स्कूल, सस्थाएं, हिंदुस्थान समाचार समूह आदि का ब्रांड एंबेसडर बनाया हुआ है।

पुरस्कार : भारत सरकार ने हाल ही में अनीता को तेनज़िंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड, हरियाणा सरकार ने नारी शक्ति पुरुस्कार, कल्पना चावला अवार्ड, सर्वोत्तम महिला पुलिस अवॉर्ड से भी अनीता को सम्मानित किया गया है। सैंकड़ो संस्थाए, समूह, संग़ठन अनिता को सम्मानित कर चुके हैं। अनेकों यूनिवर्सिटी, संस्थाओं आदि ने अनिता को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया हुआ है।

एक पर्वतारोही के साथ-साथ अनिता एक मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर भी जानी जाती है। हिंदुस्तान के हर कोने में उनको सुनने के लिए बुलाया जाता है।

अनिता एक साधारण किसान परिवार से सम्बंध रखती है। जब वे मात्र 13 साल की थी तो उनके पिता का देहांत हो गया था, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी पढ़ाई और खेल जारी रखा, खेत मे हल चलाना भी सीखा, पशुओं को पालने में भी महारत हांसिल की। अपने सभी छोटे भाई-बहनों को भी पढ़ाया। और आज करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई।

अनिता ने बताया कि मेरी इस कामयाबी में मेरी माँ और मेरे ताऊ का बहुत बड़ा योगदान है। मेरी माँ ने विपरीत परिस्थितियों में भी मुझ पर विश्वास किया, और मेरे ताऊ ने हमेशा पढ़ने और खेलने के लिए प्रोत्साहन दिया।

अनिता ने बताया कि मेरा एक ही सपना है कि हर बेटी पढ़े और खेले, अपने माँ-बाप और देश प्रदेश का नाम रोशन करें। जिस प्रकार अपने हालातों से मैं लड़ी, वे सब भी ऐसे ही बहादुरी से अपने जीवन में आने वाली चुनोतियों का सामना करें। और अपने जीवन मे सफल हो।

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article