Saturday, October 23, 2021

दावा कुछ भी हो आप का तीसरे स्थान के लिए ही है मुकाबला, भू-कानून को समर्थन देने से उक्रांद को मिली मजबूती

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देहरादून। उत्तराखंड में अगले साल के शुरू में होने वाले चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी प्रचार के मामले में अन्य सभी दलों से आगे निकल गई है। होर्डिंग-बैनर से लेकर चुनावी रोड शो, विरोध प्रदर्शन और चुनावी वादों के साथ ही मतदाताओं के साथ प्री-रिकार्डेड ऑडियो संदेशों के माध्यम से भी संपर्क साधा जा रहा है। पार्टी की कोशिश भाजपा के साथ खुद को सीधे मुकाबले में दिखाने की है, इसलिए वह कांग्रेस की कोई बात ही नहीं कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आप आज भी तीसरी या चौथी पसंद ही है और तीसरे-चौथे नंबर के लिए उसका मुकाबला उत्तराखंड क्रांति दल के साथ है।

आप ने कर्नल (रि) अजय कोठियाल को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर दिया है। कर्नल कोठियाल बहादुर सैनिक रहे हैं और उन्होंने कीर्तिचक्र सहित अनेक सम्मान हासिल किए हैं। वह एक एनजीओ के माध्यम से युवाओं को फौज में भर्ती होने का मुफ्त प्रशिक्षण भी देते हैं। कुल मिलाकर उनकी छवि बेदाग है और वह एक अच्छे उम्मीदवार हैं। हालांकि अति उत्साह में आप नेताओं ने यह कह दिया कि वह कारगिल हीरो हैं अौर कारगिल की लड़ाई में उनको चार गोलियां लगीं थीं, लेकिन सच यह है कि उन्होंने कारगिल युद्ध में हिस्सा नहीं लिया था, कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ एक ऑपरेशन के दौरान वह बुरी तरह से घायल हुए थे। इससे प्रतिद्वंद्वी दलों को उनके खिलाफ एक मुद्दा जरूर मिल गया। आप ने पहले चुनावी वादे के रूप में 300 यूनिट बिजली हर माह मुफ्त देने की बात कही है, लेकिन यह वादा यथार्थ में बदलेगा या नहीं कहा नहीं जा सकता, क्योंकि उत्तराखंड में 90 फीसदी लोग हर माह 300 यूनिट बिजली खर्च करते हैं। इसलिए निश्चित ही इसके पीछे कई किंतु-परंतु होंगे।

सवाल यह है कि दिल्ली की तरह मुफ्त रेवड़ियां बांटकर क्या आप को उत्तराखंड में भी समर्थन मिल जाएगा?  राज्य में इस समय सबसे ज्वलंत मुद्दा भू-कानून है। क्या आप इस कानून का समर्थन करेगी?  अभी तक इस मुद्दे पर आप में चुप्पी है। भाजपा इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रही है, लेकिन पार्टी के भीतर व बाहर इसे भारी समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस अभी इस मुद्दे पर चुप सी है। लेकिन, उत्तराखंड राज्य गठन के लिए लगातार आंदोलन चलाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने इस मुद्दे को खुलकर समर्थन दे दिया है। पार्टी उत्तराखंड विधानसभा के सामने इस मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुकी है। उक्रांद ने मूल निवास का वर्ष 1950 करने और हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की मांग का भी समर्थन किया है। इन मुद्दों ने उक्रांद को एक बार फिर से प्रासंगिक बना दिया है। राज्य गठन के बाद पिछले 21 सालों में भाजपा व कांग्रेस ने यहां पर बारी-बारी राज किया, लेकिन राज्य के लोगों को कोई लाभ नहीं हुआ। उत्तराखंड के ठेकों से लेकर अन्य व्यवसायों में सरकारों ने ऐसे नियम बनाए, जिसे अन्य राज्यों में रहने वाले लोग ही पूरे कर सकते थे। इसने बाहरी लोगों की मौज करा दी। रुपयों के थैले लेकर बाहर से आए लोगों ने नेताओं, अफसरों से लेकर आम कर्मचारियों की जेब काले धन से भर दीं। इसका नुकसान यह हुआ कि आम उत्तराखंडी को अपना काम कराना कठिन हो गया। रिश्वत मुंह लगने से लोगों के वाजिब काम भी आज बिना रिश्वत के नहीं होते हैं। मलाईदार पोस्टों की बोलियां लगने से आम लोगों की जेब कटने लगीं और यह दस्तूर अब भी जारी है। इतना ही नहीं दूसरे राज्य के पैसे वालों ने पहाड़ी जमीनों को भी खरीद लिया और अब वे उनकी सैरगाह में बदल रही हैं, जिससे पहाड़ की संस्कृति के साथ ही यहां की जैविक संपदा पर भी खतरा मंडराने लगा है। उत्तराखंड के युवाओं ने इन्हीं बातों को देखकर सख्त भू-कानून की मांग को उठाया है और अब यह सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गया है।

उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा इन मुद्दों को लपकने से पहाड़ी मनखी की भावना भी प्रबल होने लगी है। इसीलिए भाजपा-कांग्रेस का बेहतर विकल्प उक्रांद बन सकता है, लेकिन इसके लिए उसे सबसे पहले अपने घर को सुधारना होगा। पूर्व में चुनाव जीतने के बाद जिस तरह से उक्रांद के विधायक कांग्रेस की गोद में बैठे और उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, उस पर पार्टी को स्पष्ट रुख दिखाना होगा। पहाड़ों में बाहरी लोगों की घुसपैठ और वहां का बदलता जनसांख्यकीय संतुलन भी इस बार बड़ा मुद्दा है। आप उत्तराखंड में भी दिल्ली की तरह कांग्रेस से मुस्लिम वोटरों को खीचना चाहेगी और आप की यही कोशिश पहाड़ में उसके खिलाफ भी जाएगी। कुल मिलाकर आने वाले समय में राज्य की राजनीति बहुत रोचक होने जा रही है, लेकिन अभी पहले-दूसरे के लिए भाजपा कांग्रेस और तीसरे-चौथे के लिए आप व उक्रांद में मुकाबला है। हरियाणा की तरह आप व उक्रांद में से कौन उत्तराखंड की जेजेपी बनेगी यह समय ही बताएगा, क्योंकि किसी को पूर्ण बहुमत मिलेगा ऐसा अभी नहीं दिखता है।  

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