Saturday, October 23, 2021

राहुल के बयान पर बिफरे सिब्बल और गुलाम नबी, फिलहाल टली नए अध्यक्ष की नियुक्ति

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नई दिल्ली। राहुल गांधी को अध्यक्ष पद संभालने के लिए और अधिक समय देने की वजह से ही एक बार फिर से सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बन गई हैं। हालांकि, इस फैसले का किसी ने कोई विरोध तो नहीं किया, लेकिन जिस तरह से पार्टी में बदलाव को लेकर खुलकर बात करने वाले कपिल सिब्बल और गुलाम नबी जैसे नेताओं ने राहुल के ट्वीट का विरोध किया, उससे साफ हो गया है कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है और अब लोगों को पार्टी चलाने के वर्तमान तरीका पसंद भी नहीं आ रहा है। कांग्रेस के अनेक नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि पार्टी पहले ही रसातल में पहुंच चुकी है और अगर जल्द कोशिश नहीं हुईं तो पार्टी को उबारना मुश्किल हो जाएगा।

नया अध्यक्ष तय करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की 7 घंटे चली मीटिंग में कोई भी फैसला नहीं हो सका। सोनिया गांधी ने बैठक शुरू होते ही अंतरिम अध्यक्ष पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की, लेकिन फिलहाल वह यह जिम्मेदारी संभालती रहेंगी। एक बार फिर नए अध्यक्ष का चयन 6 महीने के भीतर करने की बात कही गई है। पार्टी में बदलाव की मांग को लेकर चिट्ठी लिखने वालों पर सोनिया ने कहा कि आगे बढ़ते हैं, जिन्होंने चिट्ठी लिखी, उनके लिए मेरे मन में कोई दुर्भावना नहीं है। कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने बताया कि गुलाम नबी आजाद, मुकुल वासनिक और आनंद शर्मा ने लिखित में यह बात कही है कि पार्टी लीडरशिप को लेकर कोई विवाद नहीं है। पार्टी में विचारों को सामने रखने की आजादी है, लेकिन इस पर चर्चा पार्टी फोरम में होनी चाहिए, ना कि पब्लिक डोमेन में।

लेकिन इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया को भेजी गई नेताओं की चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए। राहुल ने आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं ने यह सब भाजपा की मिलीभगत से किया। राहुल के इस बयान के तत्काल बाद उनका विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वालों में सबसे आगे थे गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल। हालांकि बाद में कांग्रेस ने कहा कि राहुल ने ऐसा नहीं बोला था। इसके बाद सिब्बल ने अपना ट्वीट और गुलाम नबी आजाद ने अपना बयान वापस ले लिया। दरअसल, करीब 15 दिन पहले पार्टी के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर कहा था कि भाजपा लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले चुनावों में युवाओं ने डटकर नरेंद्र मोदी को वोट दिए। कांग्रेस में लीडरशिप फुल टाइम होनी चाहिए और उसका असर भी दिखना चाहिए।

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