Saturday, October 23, 2021

चंपावत का देवीधुरा मेला जहां हर रक्षाबंधन पर होता है पत्थरों से युद्ध

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चंपावत। पाषाण युद्ध की याद दिलाने वाला देवीधुरा मेले में इस बार बग्वाल की रस्म प्रतीकात्मक रूप से ही संपन्न की गई। मां वाराही की पूजा अर्चना के बाद सोमवार को सिर्फ 45 लोगों को ही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई। बग्वाल में दो पक्ष होते हैं जो एक दूसरे पर पत्थरों की बरसात करते हैं, इन पत्थरों से खुद को बचाने ले लिए बांस के बने फर्रो का इस्तेमाल किया जाता है।

मेले का दृश्य

मान्यता है कि किसी समय यहां पर नरबलि भी दी जाती थी। बाद में इसका स्वरूप बदल कर नरबलि की जगह एक व्यक्ति के बराबर खून को अर्पित किया जाने लगा। इसी लिए इस मेले का आयोजन होता है, जिसमें पत्थरों की चोट से अनेक लोग घायल भी होते हैं। देश विदेश में प्रसिद्ध इस मेले को देखने के लिए दुनियाभर से हजारों लोग जुटते हैं। इस मेले की कुछ पुरानी झलकियां देखें-   

चंपावत
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